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सर-ए-आईना ज़िन्दगी…
सर-ए-आईना ज़िन्दगी…
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© Gulab Jain

Drama

1 Minutes   13.6K    14


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क्या करोगे तुम मुझे जानकार |

पास तो बैठे हो, पर ग़ैर मानकर |

ख़ुद क़रीब चली आतीं हैं मंज़िलें,

गर मुसाफ़िर चल पड़े ठानकर |

अपने दुश्मन को भी याद करता हूँ,

उसकी कुछ ख़ूबियों को जानकार |


जुदा हो जाएं हम बेवफ़ा होने से पहले,

ऐ दोस्त, मुझ पर ये अहसान कर |

ख़ुद को देखा एक दिन जो आईने में,

ख़ूब शर्मिन्दगी हुई पहचान कर |


Identity Life Self

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