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चाँद या सूरज !!
चाँद या सूरज !!
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© Arun Pradeep

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कल रात अचानक घर में मेरे

फट - सा गया ज्वालामुखी ;

जब भावनाओं में बहकर मैंने  -

पत्नी को कह दिया चंद्रमुखी !

 

बोली बिगड़ कर –

" मैं क्या मिट्टी - पानी से सनी हूँ ?

केवल आध्यात्मिक सोच में

 मिट्टी से बनी हूँ !

माना मेरा चेहरा

हो गया गोल मटोल ,

पर मुआ चाँद तो

लगता है ठोस फुटबॉल."

 

मैंने समझाया –

" मोहतरमा तुम १९६९ की घटना

को दिमाग से निकाल दो ,

अपोलो - ११ या बाद की खोजों पर

बस मिट्टी डाल दो ;

याद करो हमारे

बचपन वाला प्यारा- प्यारा चाँद ,

नानी की कहानी वाला

पूरणमासी का भोला चाँद !

"महाकवियों को जिसे देखकर

आता था प्रेयसी का ध्यान ;

मैं तो उसी चाँद से तुलना

कर रहा था मेरी जान !

"वैसे तो आजकल

तुम्हारा तेज़ है सूरज के जितना !

तुम्हारे आगे बन गया हूँ

मैं एक पिदना !!

आओ फिर एक बार

आज गीत ख़ुशी के गाओ ,

'चाँद -सी महबूबा हो मेरी' -

सपना सच कर दिखाओ ! "

 

 

SCIENCE

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