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Supriya Devkar

Others

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Supriya Devkar

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सागर शब्दांचा

सागर शब्दांचा

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अथांग सागर शब्दांचा 

झाला कधी अबोल 

निःशब्द भ्रमाचा भोपळा 

फूटेल की हो गोल

शब्दात माडंले विचार सारे 

झाला मनी कल्लोळ 

शब्दांची उमटू लागली 

आसमंती अस्पष्ट ओळ 

शब्दांनी रचले सारे 

उंच उंच ते मनोरे 

शब्दा विना भासते 

जिवन सारे कोरे


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