Ramashankar Roy 'शंकर केहरी'

Others


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Ramashankar Roy 'शंकर केहरी'

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शराब दर्शन

शराब दर्शन

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जार्ज गुरजिएफ एक बहुत बड़े दार्शनिक थे और उनके पास जब भी कोई नये शिष्य आते थे तो पहला उसका काम था कि वह उनको इतनी शराब पिला देता की नवागन्तुक बेहोश न हो जाए। अब यह तुम थोड़े हैरान होओगे कि कोई सदगुरु- और शिष्यों को शराब पिलाए! लेकिन गुरजिएफ के अपने रास्ते थे। हर सदगुरु के अपने रास्ते होते हैं। इतनी शराब पिला देता... पिलाए ही जाता,पिलाए ही जाता; जब तक कि वह बिलकुल बेहोश न हो जाता, गिर न जाता, अल्ल-बल्ल न बकने लगता। जब वह अल्ल-बल्ल बकने लगता, तब वह बैठकर सुनता कि वह क्या कह रहा है। उसी से वह निर्णय लेता उसके संबंध में कि कहां से काम शुरू करना है। क्योंकि जब तक वह होश में है तब तक तो वह धोखा देगा। तब तक मसला कुछ और होगा, बताएगा कुछ और। कामवासना से पीड़ित होगा और ब्रह्मचर्य के संबंध में पूछेगा। धन के लिए आतुर होगा और ध्यान की चर्चा चलायेगा। पद के लिए भीतर महत्त्वाकांक्षा होगी और संन्यास क्या है, ऐसे प्रश्न उठायेगा। भोग में लिप्सा होगी और त्याग के संबंध में विचार -विमर्श करेगा। क्यों? क्योंकि ये अच्छी- अच्छी बातें हैं और इन अच्छी- अच्छी बातों पर बात करने से प्रतिष्ठा बढ़ती है।

लोग अपनी सच्ची समस्याएं भी नहीं कहते। लोग ऐसी समस्याओं पर चर्चा करते हैं जो उनकी समस्याएं ही नहीं हैं; जिनसे उनका कुछ लेना-देना नहीं है। और अगर तुम चिकित्सक को ऐसी बीमारी बताओगे जो तुम्हारी बीमारी नहीं है तो इलाज कैसे होगा?

गुरजिएफ ठीक करता था, डटकर शराब पिला देता। और जब वह गिर पड़ता आदमी और अल्ल-बल्ल बकने लगता तब बैठकर सुनता, उसके एक -एक वचन को सुनता, क्योंकि अब वह सच्ची बात बोल रहा है। अब होश -हवास तो गया, अब हिसाब -किताब तो गया। अब वह जो कहता है, उससे उसकी सचाई पता चलेगी। वह उसके आधार पर उसकी साधना तय करता। उसको पता ही नहीं चल पाता कभी कि उसकी साधना कैसे तय की गयी।

गुरजिएफ बड़ा मनोवैज्ञानिक था! फ्रायड को तीन साल लग जाते हैं मनोविश्लेषण करने में, गरजिएफ दो- तीन घंटों में निपटा लेता था;



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