रक्षा कवच
रक्षा कवच
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"आज फिर बाहर जाते समय तुमने दिखावे का बिंदी - सिंदूर लगा लिया। अभी भी मन नहीं भरा , अपना अपमान करवा के। उसने तुम्हें तलाक दे दिया, बच्चे भी अपने पास रख लिए , तुम पर कैसे - कैसे इल्ज़ाम लगाए , फिर भी उसके नाम का सिंदूर लगाती हो।", पलक ने वसुधा से नाराज़ होते हुए कहा।
"मैं पति के नाम का सिंदूर नहीं लगाती। यह सिंदूर मेरा रक्षा कवच है। जानती हो ना , तलाकशुदा या अकेली स्त्री को हर कोई अपनी विरासत समझता है। मैं यह सिंदूर अपने नाम का , अपने सम्मान के लिए लगाती हूं। दिखावा तो बस विवाहिता होने का करती हूं। " इतना कहते हुए वसुधा ने अपनी मांग भर ली।
