STORYMIRROR

Amitosh Sharma

Children Stories Inspirational Others

3  

Amitosh Sharma

Children Stories Inspirational Others

रामोहम: नई सोच नई ज़िंदगी

रामोहम: नई सोच नई ज़िंदगी

2 mins
6

जिंदा लाशों के लिए कोई ज़िंदगी नहीं,
इसलिए उनको जीने का कोई हक़ नहीं,
ज़िंदगी बस राम बनकर जीने में है,
और राम बनकर जीना अर्थात प्रतिक्षण देह से परे ब्रह्म होना है।
अर्थात बीतते हर दिन के साथ, आप बस एक देह हैं इस सच्चाई को कम मानकर खुद को एक पवित्र आत्मा (सोच) ज़्यादा मानना है।

जो इस छक्के समाज के औकात के बाहर की बात है क्योंकि उनके लिए जन्म से जलने तक देह से बड़ी कोई सच्चाई नहीं इसलिए उसी के पीछे पुरी ज़िंदगी लगाकर बस राम के नाम का जाप करते रहना हैं,
जाप करने से बहुत होगा तो बस यही की आप एक रट्टू तोता बनकर तथाकथित हिंदू समाज का धार्मिक सर्टिफिकेट (पुजारी) पाकर बेचैन मौत मरेंगे,
इसको ऐसे भी समझा जा सकता है, उदहारण के लिए सोच कर देखिए क्या हिंदू के अलावा राम के नाम का जाप करने से एक मुसलमान या एक ईसाई को कुछ सुकून कभी मिलेगा? उसके लिए तो राम को जपना मानो तोते का एबीसीडी(ABCD)रटने जैसा होगा।

तो ये तो उस राम के वास्तविक छवि को दुनिया से छिपने जैसा हुआ और मुझ जैसे सच्चे राम भक्त से ये अन्याय तो देखा न जाए इसलिए मैं राम का पूजा या जाप करने नहीं सिर्फ और सिर्फ राम बनने बोल रहा,
जो कोई भी बन सकता है, एक नेक हिंदू या एक पवित्र मुसलमान या फिर एक सच्चा ईसाई कोई भी ।
और राम बनकर जीया हुआ एक दिन लाश बनकर जिए गए हजार साल से ज्यादा सुकून भरा होता है।।

इसलिए अपने जन्मदिन पर एक नई ज़िंदगी की नई शुरूआत बस राम बनकर करें ।।

रामोहम।। 


Rate this content
Log in