मजनूँ
मजनूँ
आज कल के युवकों के लिए बहुत अच्छी खबर लेकर हम नहीं आ रहे हैं। हालांकि कुछ बातों को आजकल के बेरोजगार युवा अच्छी तरह समझ गए होंगे। जिस प्रकार जल ही जीवन है जल के बिना जीवन शून्य है। ठीक उसी प्रकार बेरोजगारी के साथ जीवन नल्ला, निकम्मा, निठल्ला है। आजकल के युवकों को समझना होगा। वह दिल लद गए। जब चंचल हसीनाएं किसी युवक के प्रेम में पढ़कर कहती थी। कोई पत्थर से ना मारे मेरे दीवाने को हुस्न हाजिर है प्यार की सजा को पाने को।
याद रहे आज के बेरोजगार युवकों यदि आपके पास अर्थ की कमी है। तो आपका जीवन भी ठीक उसी प्रकार शून्य है।
जैसे बिन जल मछली कहने का तात्पर्य आजकल की हसीनाएं कभी भी उन लोगों को घास नहीं डालती।
जिनके पास नोटों से भरी हरियाली ना हो। जिनके पास टेक मैं गाड़ी ना हो जिनके पास हसीनाओं को बैठाने के लिए सिर्फ दिल के झरोखे हो। जिनके पास मुंगेरीलाल के हसीन सपने हो। उन्हें नए दौर की हसीनाएं घास नहीं डालती।
हम बेरोजगार युवकों को यह भी बता दें। मजनूँ बनने से अच्छा है अपने दम पर अपनी पहचान बनाई जाए।क्युकी एक उम्र निकल जाने के पश्चात माता-पिता के अलावा कोई साथ नहीं देता।
यह बात आप अच्छी तरह जानते हैं। एक दोस्त जो फेल होकर दसवीं कक्षा में रह गया है। उसका हालचाल जानने तक के लिए पास हुए विद्यार्थी पास हुए दोस्त कभी नहीं जाते। याद रहे दोस्तों जीवन में यदि सफल होना है। जीवन में कामयाब होना है तो मजनूँ बनने का भूत अपने सर से आज ही उतार दे। क्योंकि कई विद्यार्थी कई होनहार विद्यार्थी सिर्फ और सिर्फ अपने लक्ष्य से इसलिए भटक जाते हैं। क्योंकि परीक्षा से कुछ समय पहले वह हसीनाओं से दोस्ती करके बाबू ने थाना था लिया। बाबू कैसा है। जिसका नतीजा यह हुआ आज वह मजनूँ बन कर अपने फटे हाल पर रोने को मजबूर है। बेरोजगार युवकों को समझना होगा। आज लड़कियां अपने परिवार पर बोझ नहीं है। बल्कि घर पर बोझ वे बेरोजगार युवक है।
जो यदि मजनूँ ना बने होते तो घर की जिम्मेदारी संभाल रहे होते। इसीलिए कहता हूं युवकों मजनूँ बनने से अच्छा है।
अपने उज्ज्वल भविष्य की तैयारी करें। अपने उज्ज्वल भविष्य को बनाने के लिए कड़ी मेहनत करें।
अपने और अपने परिवार की जिम्मेदारी उठाने के लायक बने।
