Richa Baijal

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लॉक डाउन डे 31 : जीवन -दर्शन

लॉक डाउन डे 31 : जीवन -दर्शन

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डिअर डायरी,


लॉक डाउन डे 31 : "जीवन -दर्शन" : 24. 04. 2020


डे 31 : 24000 के लगभग कोरोना पेशेंट्स हैं और इलाज चल रहा है। प्लाज्मा थेरेपी से इलाज ढूंढने की कोशिश चल रही है। कोरोना कैसे चिपक रहा है शरीर से, कुछ मालूम नहीं हो पा रहा है। आज एक बहुत बेहतर बात सुनी किसी से। उस लड़की ने कहा कि, नेगेटिव बातें मत सोचो, कोरोना-कोरोना करोगे तो कोरोना ही आएगा। सीधी सी बात है कि जिसको बुलाओगे या जिसके बारे में सोचोगे वही हावी होगा ज़हन में।


किसी की मय्यत में जाने से लोग कोरोना पॉजिटिव आ रहे हैं। सरकार बस निष्ठावान होकर जो कोरोना पॉजिटिव मिल रहा है उसको क्वारंटाइन करने में लगी है। 31 दिन से घर में बैठे हैं ; सच कहूं तो फॉर अ चेंज शादी करने का ख्याल मन में आ रहा है। कोई अपना-सा हो और जो सिर्फ मेरा हो। कभी-कभी संघर्ष से हटकर किसी की बाँहों में थम जाने को दिल करता है। अकेले तो हम तब भी थे, लेकिन ये जो हमने ज़हन को 'लॉक डाउन' कर लिया है, तो बस सामने वो ऊन का गोला ही नाच रहा है जिसमे सलाइयां लगी है। इतनी विपरीत परिस्थिति में भी जिसको माता रानी का स्वरुप दिख जाये, या जो ब्रह्म को सुमिरन कर सकें; वहीँ है सच्चे मनुष्य। और ये सब सिर्फ 'मैडिटेशन' से आ सकता है। अपनी ऊर्जा को बढ़ाओ, योग करो। लेकिन फिर वही है कि लापरवाही मत करो। वो एक मीटर की मर्यादा मत तोड़ो। 


इसे ही जीवन-दर्शन कहते हैं। मनुष्य इस वक्त संयत है और 24 घंटे इंटरनेट में सर खपाने के बाद भी वो ताज़ी हवा के एहसास को झुठला नहीं सकता; साथी की कमी को नकार नहीं सकता और बारिश की फुहार में आँखें मूँद कर नहाने से खुद को रोक नहीं सकता। जब चीज़ें कम हो जाती हैं जीवन में, तो उनका एहसास तीव्र हो जाता है। ऑफिस को इस वक्त कोई भी 'मिस' नहीं कर रहा है; सब 'फॅमिली टाइम' एन्जॉय कर रहे हैं। फ़िक्र तो तब होती है जब 'ज़रूरत' के लिए पैसा चाहिए होता है। इस वक्त मनाली, नैनीताल जैसे हिल स्टेशंस पर रहने वाले प्रकृति के बिलकुल करीब होते होंगे। सुकून और इत्मीनान ; बस यही जीवन है।


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