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Vikram Singh Negi 'Kamal'

Children Stories Classics Inspirational

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Vikram Singh Negi 'Kamal'

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कर्मपूजा ( एक लघुकथा)

कर्मपूजा ( एक लघुकथा)

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बाजार में क्षेत्रपाल पंडित जी की पूजन सामग्री की दुकान थी तभी उनकी दुकान पर उपाध्याय जी का आना हुआ ।पंडित जी ने उन्हें बैठाया और पूछा- "उपाध्याय जी, ये कर्मपूजा कैसी होती है? जरा बताइए तो.. "
उपाध्याय जी चौंके और पूछा - "पंडित जी, कर्मपूजा ? कौन कर रहा है यह पूजा? "
पंडित जी बोले - " बात यह है कि अभी कुछ देर पहले मेरी दुकान में एक ग्राहक आया और उसने कहा कि यहाँ कच्चा सफेद धागा मिलेगा? तो मैंने अनायास ही पूछ लिया कि जनेऊ हेतु? तो उसने मना किया कि नही कच्चे धागे का गोला चाहिए और आठ दस गोले चाहिए । तो मैंने पूछा किस पूजन हेतु? तो उसने जवाब दिया कि -कर्मपूजा करनी है । अब मैंने कई पूजन सुने हैं किए हैं,पर यह अलग लगा., तो यह सुनकर उससे पूछ लिया कि कैसी कर्मपूजा? तो उसने हँसकर कहा - अरे पंडित जी, इसमें अलग अलग पोथियों का ढेर बनाकर उन्हें धागे से बाँधा जाएगा, फिर कुछ समय बाद उन धागों को खोलकर उन पोथियों की जाँच कर उनमें अंक गणना की जाएगी और फिर से बाँधकर रख देंगे । वास्तव में वे पोथियाँ जिनकी होंगी वे उनका भविष्य निर्धारण करेंगी, बस यही हमारी कर्मपूजा है और इस हेतु ही धागा चाहिए ।" पंडित जी ने इतना कहा तो उपाध्याय जी जोर से हँसे और कहा - " अरे पंडित जी, आपकी दुकान से धागा लेने जो आए थे, वे अध्यापक थे और बच्चों की उत्तर पुस्तिकाओं को बाँधने के लिए वे धागे लेने आए थे, उनके लिए तो यही कर्मपूजा है न.....? "

 [समाप्त]


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