ख़्वाब
ख़्वाब
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’ख़्वाब’, मन की वह अवचेतन अवस्था होती है जिसमे शरीर सुषुप्ता अवस्था में होती है मगर मन जागृत रहता है।
ख़्वाब अच्छे भी होते हैं और बुरे भी... कभी-कभी स्वप्न की दुनिया में जीने की इच्छा होती लेकिन कभी-कभी डर भी लगता है बहुत।
ख़्वाब तो ख़्वाब ही होता है, हक़ीकत से इसका कोई लेना देना नहीं होता...
स्वप्न में इन्सान जानें कहाँ-कहाँ से घूमकर उठता अपने बिस्तर से ही है।
कभी लड़ाई तो कभी इज़हार जानें क्या क्या गुल खिलाता है ख़्वाब!
