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Komal Tandon

Children Stories Children

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Komal Tandon

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कौआ चला हंस की चाल

कौआ चला हंस की चाल

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 एक घने जंगल में कागा नाम का एक कौआ रहता था। वो स्वभाव से बहुत झगड़ालू था और उसकी वाणी भी बहुत कठोर थी। जब वह सुबह-सुबह काँव-काँव की पुकार लगाता तो आसपास रहने वाले अन्य पक्षी अपने कान बंद कर लेते। जिस पेड़पर वह रहता था एकबार वहाँ रहने एक सफेद कबूतर आया जिसका नाम कुक्कु था। कुक्कु दूध के समान उजले रंग का था और वह बहुत मधुर आवाज में गुटरगूँ करता था जिसके कारण सारे पक्षी उसे पसंद करने लगे।

यह देखकर कागा को बड़ा आश्चर्य हुआ , वह तो जाने कब से इस पेड़ पर रह रहा था , पर कोई भी अन्य पक्षी उससे कभी बात नहीं करता था, जबकि इसे आये अभी कुछ ही दिन हुए हैं और सबसे ऐसे मित्रता कर ली है मानों ये यहाँ सालों से रह रहा है। जब कभी कागा अन्य पक्षियों को कुक्कु से हँस-हँस कर बात करते देखता तो जल भुन जाता। उसे लगने लगा कि कुक्कु सफेद है और वो काला इसीलिये सारे पक्षी कुक्कु को पसंद करते हैं। अगर वह भी उसकी तरह सफेद होता तो सब उसे भी पसंद करते और उससे दोस्ती कर लेते। एक दिन गुस्से में कागा ने कुक्कु का घोंसला ही तोड़ दिया। जब शाम को कुक्कु दाना चुगकर वापस आया तो उसके पड़ोसी पक्षियों ने उसे सारी बात बताई।

कुहू कोयल (समझाते हुए)-“कुक्कु रोओ मत जो हुआ सो हुआ। हम तुम्हारी नया घोंसला बनाने में सहायता कर देंगे। “

रट्टू तोता(मुस्कुराकर) –“हाँ दोस्त तुम चिंता मत करों हम कल ही नया घोंसला तैयार कर देंगे।“

चुग्गू चिड़ा(प्यार से) – “आज रात तुम मेरे घोंसले में सो जाओं। “

कुक्कु कबूतर (मुस्कुराकर)-“आप सबका धन्यवाद, पर मैं कागा से पूछना चाहता हूँ कि मैंने उसका क्या बिगाड़ा था जो उसने मेरा घोंसला तोड़ दिया?“ 

कागा ने कुक्कु को आपने घोंसले की ओर आते देखा तो अकड़कर डाल पर खड़ा हो गया।

कागा (गुस्से से )- “क्या तुम मुझसे लड़ने आये हो ?” 

कुक्कु (मुस्कुराकर)- “नहीं मैं बस ये जानना चाहता हूँ कि तुमने मेरा घोंसला क्यों तोड़ा ?” 

कागा (अकड़कर )- “क्योंकि मैं तुम्हारा घमंड तोड़ना चाहता था। तुम्हें अपने सफेद रंग पर बहुत घमंड है न इसलिए तुम्हें सबक सिखा रहा था। “ कागा ने नफरत से कहा।

कुक्कु (हंसकर)- “ओह तो ये बात है, अब मैं समझा , दरअसल कुछ महीने पहले तक मैं भी अपने काले रंग से बहुत परेशान था, तो मैं समझ सकता हूँ कि तुम्हें कैसा लगता होगा और किस मजबूरी में तुमने मेरा घोसला तोड़ा होगा ? कोई बात नहीं मुझे तुमसे सहानुभूति है, अच्छा अब मैं चलता हूँ। “ कोको ने कहा और जाने को हुआ, तभी कागा ने उसे रोका।

कागा (आश्चर्य से )- “रुको.......... तुम क्या कहना चाहते हो ? कुछ महीने पहले तक तुम काले थे और अब सफेद हो गये हो। पर कैसे ?”

कुक्कु (नखरा करते हुए)“मैं तुम्हें क्यों बताऊं ? तुमने तो मेरा घोंसला तोड़ा है। “ 

कागा (बेचारगी से )- “मैं माफी मांगता हूँ और वादा करता हूँ कि मैं उसे फिरसे बना दूँगा तब तो मुझे बताओगे न कि कैसे तुम काले से सफेद हो गए ?”

कुक्कु (मुस्कुराकर)- “हाँ बिल्कुल। “ 

जिसने उसका घोंसला तोड़ा था अगले दिन वही कागा उसका घोंसला बना रहा था। यह देखकर सभी पक्षी आश्चर्य कर रहे थे ।

घोंसला तैयार करने के बाद कागा ने कुक्कु से अपने पंखों को सफेद करने का उपाय पूछा तो कुक्कु ने बताया -

कुक्कु (समझाते हुए)- “यह बहुत आसान है , मैंने गोरे होने के लिए नदी किनारे एक पत्थर पर अपने शरीर को खूब घिसा, इतना कि मेरे सारे काले पंख झड़ गये। फिर मेरे जो नये पंख निकले वो खुद ब खुद सफेद थे। “

कागा (कुछ सोचकर )- “ओह तो ये बात है। “

कुक्कु (अभिनय करते हुए)- “जरूर........ चलो मैं तुम्हें दिखाता हूँ कि मैनें किस पत्थर पर अपना शरीर घिसा था। “ कुक्कु उसे नदी तट पर लेकर गया और एक बहुत ही खुरदुरे से पत्थर की ओर इशारा करके कहा –“ वो देखो उस पत्थर पर मैंने अपने शरीर को तब तक रगड़ा जबतक कि सारे काले पंख झड़ नहीं गये। तुम्हें भी बस यही करना है। मेरी शुभकामनाएँ तुम्हारे साथ हैं। “ 

इतना कहकर कुक्कु वहां से चला गया।

सभी पक्षी कुक्कु से जानना चाहते थे कि कागा जैसे कर्कश व मतलबी पक्षी ने उसका घोंसला बनाने में उसकी सहायता क्यों की ? कुक्कु ने उन्हे पूरा किस्सा कह सुनाया कि इस तरह वह कागा को सबक सिखाना चाहता था। सारे पक्षी उसका प्लान सुनकर हँसने लगे और उसे शाबाशी देने लगे।

इधर कागा सुबह से शामतक बिना कुछ खाये पिये जल्दी से जल्दी अपने पंखों को पत्थर पर रगड़ता रहा। जब उसने देखा कि अब उसके सभी पंख झड़ गये हैं तो वह आश्वस्त होकर अपने घोंसले की ओर उड़ने को हुआ पर यह क्या ? वो तो उड़ ही नहीं पा रहा था। बिना पंखों के भला वह कैसे उड़ सकता था ? जल्दी से जल्दी सफेद पंख उगाने के चक्कर में वो यह तो भूल ही गया कि कोई भी पक्षी पंख बिना नहीं उड़ सकता और अगर वह उड़ न सका तो घर कैसे जाएगा ? 

अब वह पछताने लगा कि उसने कुक्कु का घोंसला क्यो तोड़ा और उससे बैर क्यों मोल लिया ? वो समझ गया कि कोको ने ऐसा उससे बदला लेने के लिये किया है। वो कैसे भूल गया कि पंख ही एक पक्षी के बचाव का एक मात्र साधन है? उसकी आँखों के सामने बिल्लू बिल्ले का चेहरा घूम गया। वो तो उसे सूँघकर किसी भी समय यहां पहुंच ही रहा होगा। आज तो बिल्लू उसे खा ही जाएगा।

उधर रात घिरने लगी तो कुक्कु कबूतर परेशान हो उठा। वो कागा को सबक तो सिखाना चाहता था पर उसकी जान मुसीबत में पड़ जाए ऐसा वो नहीं चाहता था। जब रात घिर आई और कागा नहीं लौटा तो कुक्कु ने उसकी तलाश में जाने का निर्णय लिया।

 तभी रट्टू तोते ने कुक्कु को आवाज दी।

रट्टू (आश्चर्य से )- “अरे कुक्कु इतनी रात गये कहाँ जा रहे हो ?“

कुक्कु (घबराकर) –“रट्टू भाई कागा को ढूंढने जा रहा था। वह अभीतक लौटा नहीं। कहीं किसी मुसीबत मे न फंस गया हो। “

चुग्गू चिड़ा (मुस्कुराकर) –“तुम वाकई बहुत भले पक्षी हो कुक्कु भाई, जिसने तुम्हारे साथ बुरा किया तुम्हें उसी की चिंता हो रही है। “

कुक्कु (समझाते हुए) –“चुग्गू भाई, कागा ने तो सिर्फ मेरा घोंसला तोड़ा था, पर लगता है कि मेरे कारण तो उसे अपने प्राण तक गंवाने पड़ जाएंगे। तो ऐसे में उससे बुरा पक्षी तो मैं हुआ न। “

कुहू कोयल(खुश होकर) –“वाह कितनी अच्छी सोच है तुम्हारी। तुमने सही कहा कोई अगर हमारा बुरा करता है और बदले में हम भी उसका बुरा करें इससे तो हम उससे भी बुरे हो जाएँगे। चलो मैं भी तुम्हारे साथ चलता हूँ। “

रट्टू तोता , चुग्गू चिडा और कुहू कोयल के साथ कुक्कू कबूतर नदी तट पर पहुँचा तो पाया कि कागा बिना पंखों के वहीं पत्थर पर दुबका पड़ा था।

कुक्कु (पछताते हुए)- “कागा भाई मुझे माफ कर दो मैं बदले की आग में जलते हुए बहुत बुरा करने जा रहा था। भगवान का शुक्र है कि तुम अभी तक सुरक्षित हो। “ 

कुहू (प्यार से )- “हम तुम्हें लेने आए हैं कागा। तुम चिंता मत करो जबतक तुम्हारे सारे पंख फिर से नहीं उग आते तबतक हम तुम्हारा ख्याल रखेंगे। “ 

कागा (दुख से )- “धन्यवाद कुहू। और मुझे अफसोस है कि मैं अपने कड़वे बोल और काले पंखों के कारण कभी तुम लोगों का प्रिय पक्षी नहीं बन सका। “ 

रट्टू (प्यार से )- “कागा भाई सच कहूँ तो मैं सदा तुमसे यह सोचकर जलता रहा कि तुम्हारे काले पंखों और कड़वी बोली के कारण तुम कितना आजाद जीवन जीते हो , जबकि हम तोतों को मनुष्य हमारे हरे रंग व आवाज के कारण पिंजरे में बंद करके रखते हैं। मैं तो हमेशा से तुम्हारे जैसा बनना चाहता था ताकि कोई मुझे कैद न कर सके और मैं जहाँ चाहूँ स्वतंत्रता से उड़कर जा सकूँ। “ 

कागा (आश्चर्य से )- “क्या तुम सच कह रहे हो ?” 

रट्टू तोते न हाँ मे सिर हिलाया। इसके बाद वो सब मिलजुल कर कागा को वापस ले आये।

कुक्कु (सकुचाते हुए)- “कागा मैंने तुमसे झूठ कहा था मेरे पंख तो सदा से सफेद थे। मुझे अफसोस है कि तुम्हे आगे भी काले पंख ही आएंगे। मुझे माफ कर दो। “ 

कागा (मुस्कुराकर)- “कोई बात नहीं कुक्कु मुझे अपने काले वाले पंख ही चाहिएं। भगवान ने मुझे ऐसा ही बनाया है और भगवान कभी गलती नहीं करते। आज मैं समझ गया हूँ कि मेरी रक्षा के लिए ही भगवान ने मुझे काले पंख व कठोर वाणी दी है। मैं अब कभी दूसरों के जैसा नहीं बनना चाहता। मैं जैसा भी हूँ अच्छा हूँ और ऐसा ही रहना चाहता हूँ। “ 

कुक्कु (सकुचाते हुए )- “तुमने सच में मुझे दिल से माफ कर दिया न ?” 

कागा (पछताते हुए )- “हां मेरे भाई। मैंने तुम्हे माफ कर दिया अब तुम भी मुझे माफ कर दो। मुझे तुम्हारा घोंसला नहीं तोड़ना चाहिए था। “ 

कुक्कु (आश्चर्य से )- “पर तुमने ही मेरा घोंसला बना भी तो दिया था और ये वाला पहले वाले से ज्यादा सुंदर और मजबूत है। फिर माफी किसलिये?“

कागा (समझाते हुए )- “मैंने तुम्हारा घोंसला इसलिए बनाया था क्योंकि मैं तुमसे सफेद पंख उगाने की विधि जानना चाहता था। यह काम मैंने अपने स्वार्थ के लिए किया था न कि तुमसे माफी मांगने के लिए , पर अब मैं तुमस दिल से क्षमा मांग रहा हूँ। मझे माफ कर दो दोस्त। “

कुक्कु( प्यार से )“कागा मेरे दोस्त। “ 

 कुक्कु कागा के गले लग गया। सभी पक्षी खुशी से तालियां बजाने लगे।

कागा के नये पंख आने में और उड़ने लायक बनने में पांच छः महीने लग गये। सभी पक्षी मिलकर उसके लिए दाना पानी लेकर आते और सुबह शाम उसकी डाल पर बैठकर गप्पें मारा करते। कागा को यह बहुत अच्छा लगता। अब उसे भी ढेर सारे दोस्त मिल गये थे और वो भी अपने पंखों का रंग बदले बिना।

तो इस कहानी से हमें यह शिक्षा मिलती है कि हमें अपनी कमियों पर दुखी नहीं होना चाहिए बल्कि अपनी खूबियों को और भी निखारने की कोशिश करनी चाहिए। साथ ही यह शिक्षा भी मिलती है कि हमें बदले की भावना से किसी का अहित नहीं करना चाहिए।


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