Kamini sajal Soni

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4.0  

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इंद्रधनुष के रंग

इंद्रधनुष के रंग

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मौसम अपने पूरे शबाब पर था..... कितना सुहाना

मनमोहक वातावरण जैसे प्रेम के प्यासे चंदा और चकोरी की मिलन की खुशी का जश्न मना रहा था। वर्षा की फुहारों की ठंडक से आल्हादित

नेहा अपने पति नीरज की सांसों की गर्माहट महसूस कर रोमांचित हो रही थी। और हो भी क्यों ना रोमांचित अभी शादी के दिन ही कितने हुए थे लेकिन एक छत के नीचे रह कर जो जुदाई की तपन उसने महसूस की उसका वर्णन शब्दों में करना मुश्किल है। शादी की सारी रस्मो रिवाज से फुर्सत होकर सभी रिश्तेदार अपने अपने घर चले गए और घर में रह गई सिर्फ सासू मां , नेहा और नीरज। नेहा के ससुर सरकारी ऑफिसर थे तो वह भी शादी की सारी रस्मो रिवाज निपटा कर अपनी नौकरी पर वापस चले गए।


सासु मां ने नया फरमान जारी किया कि हमारे घर में बहू ससुराल में अपने पति के साथ एक कमरे में नहीं सोती बल्कि सास के साथ सोती है बेचारी नेहा सुनकर अवाक रह गई। अब बात ही ऐसी थी कि वह कुछ बोल नहीं सकती थी बस चुपचाप खामोश रहकर अंदर ही अंदर एक छत के नीचे रहकर पति से वियोग की कल्पना से ही छटपटा उठी थी। और सासू मां ने नेहा से स्पष्ट शब्दों में कह दिया कि अगर इस बात की भनक तुमने नीरज के कानों में भी पड़ने दी तो मुझसे बुरा कोई नहीं होगा सहम गई थी नेहा।


अब दिन में भी नेहा के ऊपर सासु मां का कड़ा पहरा रहता और रात में वह अपने साथ सुलाती, नीरज को भी यह माजरा समझ में नहीं आ रहा था अब वह अपनी मां के सामने क्या कहता। नेहा की चाची सास माधुरी जी का घर बिल्कुल सटा हुआ था एक दिन उन्होंने नेहा को बुलाया और उससे पूछा कि नीरज रात में कितनी आवाज़ लगाता है???

नेहा ! आवाजें लगाते हैं....

माधुरी जी!! क्यों तुम कहां रहती हो जो इतने आश्चर्य से पूछ रही हो...

नेहा ने सकुचाते हुए जवाब दिया जी मैं सासु मां के साथ सोती हूं।

नेहा के मुंह से इतना सुनते ही मालती जी के नेत्र विस्मय से फैल गए और डांटते हुए बोली....

यह मैं क्या सुन रही हूं????

तुम्हारी इतनी हिम्मत तुम मेरे बेटे के साथ ऐसा व्यवहार करो!!

नेहा ने डरते हुए कहा पर मुझ को सासु मां ने ही ऐसा करने को कहा है और उसने शब्दश:पूरा वृत्तांत मालती जी को कह सुनाया ..

नेहा के मुख से पूरी बात सुनने के बाद मालती जी ने समझाया कि तुम यहां ससुराल में अपने पति के साथ लिए हुए सात फेरों का संबंध निभाने आई हो ना कि अपनी सास की अनैतिक बात का अनुसरण करने, सबसे पहली जिम्मेदारी तुम्हारी नीरज को सदैव खुश रखने की है तुम्हारे किसी भी व्यवहार से उसको कष्ट नहीं होना चाहिए। और इसके लिए अगर तुम्हें अपनी सास से भी विरोध करना पड़े तो करो यह तो तुम्हारा अधिकार है। एक बार अगर पति का प्यार तुमने खो दिया तो फिर एक नौकरानी से ज्यादा तुम्हारी इस घर में कोई हैसियत नहीं रह जाएगी।


अपनी चाची सास से ऐसे स्नेहिल और प्यार भरे शब्द सुनकर नेहा फफक फफक कर रो पड़ी। और सिसकती हुए बोली यह बात ही ऐसी थी कि मैं किससे शेयर करती क्योंकि मायके में भी नेहा सबसे बड़ी बहन थी उससे सभी छोटे भाई बहन थे कोई भाभी भी नहीं थी कि वह ससुराल की रीति रिवाज समझाती मां से वह संकोच वश इतनी नाज़ुक बात बता नहीं सकती थी।

मालती देवी ने प्यार से सर पर हाथ फिराते हुए कहा अब आइंदा से मुझे यह शिकायत सुनने का मौका ना मिले और तुम आज से नीरज के साथ ही सोना।

शायद पति को खो देने के डर से नेहा के अंदर इतनी हिम्मत आ गई थी कि वह सासु मां के बोलने पर भी नहीं रुकी और नीरज के कमरे की ओर अपने संपूर्ण अधिकारों की रक्षा हेतु कदम बढ़ा दिए।


जब नीरज ने नेहा को कमरे में प्रवेश करते देखा तो चौक गया और शिकायती लहजे में बोला कि शायद मैं तुम्हारी पसंद नहीं हूं इसीलिए तुम मुझसे दूर रहना चाहती हो ?? मैं तुम्हें परेशान करना नहीं चाहता अगर तुम बोलोगी तो मैं तुम्हारे मन के जैसा करूँगा नीरज के मुंह से इतना सुनना था कि नेहा की आंखों से विवशता के आँसू बह निकले और एक ही सांस में उसने सारी बातें नीरज को बता दी।

नीरज आवेश में आकर बोला मां ने ऐसा क्यों किया पर नेहा ने प्यार से समझाया कि शायद वह तुम को मेरे साथ बांटना नहीं चाहती थी और उनको इकलौते बेटे को खो देने का डर था शायद इसीलिए उन्होंने ऐसा किया।


नेहा के मुख से सारी बात सुनकर आज तो नीरज ने जैसे जन्म जन्म का प्यार नेहा पर लुटाया क्योंकि वह भी तो तरस रहा था नेहा का सानिध्य पाने के लिए।

पर अनजाने में उसके मन में ग़लतफहमी पैदा हो रही थी।

कहते हैं ना कि ईश्वर मदद के लिए खुद नहीं आता बल्कि किसी ना किसी रूप में वह इंसानों की मदद के लिए जरूर आता है और शायद नेहा की जिंदगी में उसकी चाची सास ही ईश्वर का रूप बनकर आई जिसकी वजह से उसकी बिखरती गृहस्थी फिर से इंद्रधनुष के सात रंगों जैसी रंगीन हो गई।

और मौसम भी नेहा की खुशी में झूम कर बरस रहा था।



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