Shubhra Varshney

Others


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Shubhra Varshney

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गणित

गणित

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"यह सब तुम्हारे बाहर ज्यादा खाने का नतीजा है रवि और देखो तो तुमने अपनी रूटीन क्या बना रखी है।"

रवि को दलिया देते हुए उसकी मां ने कहा।

"पर मां मैं तो जिम ट्रेनर के अनुसार ही डाइट लेता हूं। पता नहीं क्या हो रहा है मुझे।"

रवि के स्वर में उसकी चिंता साफ झलक रही थी। पिछले दिनों अपनी बदलते स्वास्थ्य से परेशान था।

कल तीसरी बार हुआ था जब रवि को इस तरह चक्कर आया था। जितनी कमजोरी उसे इन दिनों महसूस हो रही थी वह पहले कभी ना हुई थी।

सुबह मां को बताया तो उन्हें चिंता हो गई वह खुद भी बहुत हैरान था। उसे याद नहीं था पिछली बार कब बीमार पड़ा था।

स्कूल टाइम से ही उसकी गिनती एक फिट स्मार्ट और स्टाइलिश लड़कों में होती थी ।

खेलों का दीवाना वह बहुत कम उम्र से ही अपने खाने-पीने और फिजिक का ध्यान रखता था। और इसी के चलते उसने हमेशा एक स्ट्रिक्ट डाइट फॉलो की थी।


एक व्यवस्थित जीवन जीने का आदी हो चला था वह और इसी के चलते प्रोफेशनल लाइफ में भी उसने बहुत जल्दी कामयाबी हासिल कर ली थी।

25 साल का होते होते उसने एक बहुराष्ट्रीय कंपनी में जीएम का पद भी संभाल लिया था।

अब उसके माता-पिता उसकी प्रोफेशनल लाइफ की तरह उसकी पर्सनल लाइफ को भी व्यवस्थित करना चाहते थे और इसी के चलते उन्होंने उसके विवाह के लिए प्रयास शुरू कर दिए।

रवि के जीवन में तो प्यार का बीज जो स्कूल टाइम से डाला था वह अब प्रेम के वटवृक्ष में परिवर्तित हो गया था।

यह अलग बात थी कि उसकी चयन कीर्ति ने उसके प्रपोजल को स्वीकार करने में लंबा समय ले लिया था।

रवि के माता पिता उसके चुनाव से बहुत खुश नहीं थे हालांकि कीर्ति बहुत प्यारी लड़की थी पर पहली नजर में उसके व्यवहार ने उनके मन को नहीं छुआ था।


लेकिन रवि की खुशी में ही उन्होंने अपनी खुशी ढूंढने का मन बना लिया था।

दोनों के परिवार ने उन दोनों का रोका बहुत जल्दी करने का विचार कर लिया था।

दोनों ने अभी नियमित मिलना ही शुरु करा था कि रवि को अपने स्वास्थ्य में गिरावट साफ समझ आ रही थी।

"रवि तुम्हें अपने सारे चेकअप कराने होंगे।" पापा की आवाज़ से रवि की तंद्रा भंग हुई।

"हम्म देखता हूं आज ऑफ़िस से हाफ डे लेकर हॉस्पिटल जाता हूं।" रवि ने अपना नाश्ता लगभग खत्म करते हुए कहा।

"मैं तुम्हारे साथ चलूंगा।" पापा ने अधीरता से कहा।

"नहीं पापा कीर्ति हॉस्पिटल आ जाएगी, मेरी उससे कल बात हो गई है। आपको परेशान होने की जरूरत नहीं है।" रवि ने कार की चाबी उठाते हुए बाहर निकलते हुए कहा।

उधर कीर्ति बहुत अनमनी थी।

वह स्कूल टाइम से जानती थी कि रवि उसे पसंद करता था।

शुरू में उसकी रवि में कोई विशेष रूचि नहीं थी पर जब रवि ने कैरियर में ऊंचाइयां छूनी शुरू कर दीं तो उसने गणित लगा लिया था कि रवि के साथ उसका जीवन सुखमय कटेगा।

पिछले कुछ दिनों से रवि का पीला चेहरा और गिरता स्वास्थ्य उसे खिन्न कर रहा था।

वह नियत समय पर रवि से अस्पताल में मिली।

रवि ने डॉक्टर से पहले से ही अपॉइंटमेंट ले रखा था।

शुरुआती जांच के बाद डॉक्टर ने उसे और जांचें कराने के लिए कह दिया।

ईसीजी ,सीटी स्कैन व ब्लड सैंपल देकर वह कीर्ति के साथ दो घंटे बाद अस्पताल के बाहर था।

रिपोर्ट्स अगले दिन मिलनी थी।

अगला दिन बहुत व्यस्त था रवि के लिए।

विदेश से कंपनी के प्रोजेक्ट हेड आने वाले थे तो उसका अगले दिन डॉक्टर से मिलना मुश्किल था।


"मैं रिपोर्ट्स नेट से निकाल लूंगा।" रवि ने कैंटीन में कॉफी पीते हुए कीर्ति से कहा।

"नहीं मैं हॉस्पिटल से ही रिपोर्ट्स इकट्ठा कर डॉक्टर से भी मिल लूंगी तुम चिंता मत करो कल मैं दोपहर में हॉस्पिटल आ जाऊंगी।" कीर्ति के कहने पर रवि मुस्कुरा दिया वह खुश था कीर्ति उसका इतना ध्यान जो रख रही थी।

अगले दिन कीर्ति समय पर अस्पताल पहुंच गई थी उसने रवि को फोन पर बता दिया कि वह अस्पताल आ चुकी है ।

काउंटर से उसने रवि की रिपोर्ट्स कलेक्ट की।

ईसीजी व सीटी स्कैन की रिपोर्ट बनने में देर थी, ब्लड रिपोर्ट आ चुकी थी।

नाम बताने पर सिस्टर ने उसे रिपोर्ट पकड़ा दी, रवि की रिपोर्ट्स देखकर अब उसे चक्कर सा गया था।

रवि को डायबिटीज ही नहीं रिमिटेड हार्ट डिजीज भी डायग्नोज हुई थी।

कीर्ति का दिमाग बहुत तेजी से चलने लगा। वह तेजी से काउंटर पर छोड़कर बाहर निकलने लगी।

हड़बड़ाहट में उसे यह भी समझ में नहीं आ रहा था कि पीछे से सिस्टर उसे आवाज़ दे रही थी।

बाहर निकलते हुए उसे सारा गणित समझ में आ रहा था और उसने सबसे पहला काम रवि का नंबर ब्लॉक करके करा।

उधर कीर्ति का फोन न पहुंचने पर रवि परेशान था उसे चिंता थी पता नहीं रिपोर्ट्स कैसी आई थी।

वह लगातार कीर्ति का नंबर मिला रहा था पर नंबर मिलता भी कैसे।

हां कीर्ति ने उसको संदेश जरूर छोड़ा हुआ था कि वह उससे कभी मिलने की कोशिश ना करें।

परेशान रवि बॉस से आधे दिन की छुट्टी की गुजारिश कर हॉस्पिटल पहुंचा।

"सॉरी सर पहले गलत रिपोर्ट मैम को दिए गये थे। हम उनसे कहना भी चाह रहे थे कि इसमें सरनेम दूसरा है। पर वह शायद जल्दी में थी गलत रिपोर्ट यहीं पर रखकर, बिना सुने बाहर निकल गई।" सिस्टर की यह बात रवि को समझने में अब कोई दिक्कत नहीं हो रही थी।

अपने खून में आई मामूली मिनरल्स की कमी के साथ बाहर निकलते हुए अब रवि पूर्णता संतुष्ट था।

उसने भी अस्पताल से बाहर निकलते हुए सबसे पहला काम कीर्ति का नंबर डिलीट करके करा।

वह कीर्ति को समझ चुका था, वह जल्दी से जल्दी मम्मी पापा से मिलकर उनकी सहमति में अपनी सहमति मिलाना चाहता था।

कीर्ति की गणित की समझ ने उसके जीवन के प्रश्नपत्र को हल करने में बहुत मदद की थी।



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