vijay laxmi Bhatt Sharma

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vijay laxmi Bhatt Sharma

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डायरी लॉक्डाउन २ चौदहवाँ दिन

डायरी लॉक्डाउन २ चौदहवाँ दिन

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प्रिय डायरी

आज कोरोना लौकडाउन २ का चौदहवाँ और पूरे लॉक्डाउन का 35 दिन, ये दिन भी जाएगा कैसे ना कैसे गुजर ही जाएगा जैसे बाकी 34 दिन गुजर गए। विश्व में कोरोना संक्रमित संख्या 30.64 लाख और ग्रास हुई संख्या 2.11 लाख तथा हमारे देश में संक्रमित संख्या 29 हजार से अधिक हो गई है, इसके ग्रास बने लोगों की संख्या पौने नौ सौ हो गई है। घर में रहें, लौकडाउन का सम्मान करें। कोरोना से लड़ने वाले कर्मवीरों को नमन ... जय हिंद...

प्रिय डायरी आज ऑफ़िस आना भी हुआ... रफ़्तार से भागती गाड़ियों की आवाज़ गुम थी आज कहीं... सड़कें वीरान और पार्क सुनसान थे ... कभी इस लोधी गार्डन के आगे से निकलते थे तो गाड़ी की लम्बी क़तारें खड़ी होती थीं आज सुनसान ये भी उदास बैठा था की उस पर चहलक़दमी वाले अब आते नहीं.... इंडिया गेट खड़ा है अपनी विरासत सम्भाले पर अब इस पर नहीं लगते हर शाम मेले... नहीं होतीं अब रौनकें... मेरा ऑफ़िस भी अपनी विरासत सम्भाले है पर वीरान है जहां कभी रौनके भी शर्मा जाती थीं वहाँ एक शान्त गमगीन माहौल था।

प्रिय डायरी आज याद आती है कहावत “ सब दिन होत न एक समान” हर चीज बदल जाती है समय के साथ और इतिहास बन जाती है... आज जिस समय से हम गुजर रहे हैं ये भी निकल कर इतिहास के किसी पन्ने मे दर्ज हो जाएगा... जो बच निकलेंगे वो कहानियाँ सुनाएँगे जो चले जाएँगे वो कहानियाँ बन जाएँगे।

जब ऑफ़िस गई तो सोचा की कभी हम सभी मित्र चाय पर मिलते थे तो एक दूसरे से खुशी और ग़म बाँटते थे पर अब वो मेज़ और कुर्सियाँ खुद दास्ताँ बन गई हैं ... खुद ही अपनी तन्हाई से जूझती धूल खाती पड़ी हैं... जिन गलियारों में खड़े हो हम बतियाते थे काम और बेकाम की बातें वो गलियारे शान्त हैं अब नहीं सुनाई देती कोई पदचाप इन पर।

प्रिय डायरी कभी ऐसा मंजर देखा नहीं जो अब देखने को मिल रहा है... मेरा मेरा करते करते किसी का भी नहीं रहा वक्त .... ये वक्त भी कुछ सिखा कर ही जाएगा .... मेरी प्रिय सखी आज इतना ही अब विश्राम लूँगी....

ये वक्त हमे परखने आया है

कुछ सिखाने आया है

कुछ दिखाने आया है

ऐ वक्त हम भी दिखा देंगे

हौसलों की कमी नहीं हम में

ये वक्त यूँ ही हँसते हँसते गुजर जाएगा।


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