अनोखा रिश्ता
अनोखा रिश्ता
कुछ ऐसा स्वभाव की जीवन में बहुत जल्द किसी से प्रभवित नही होती बात उन दिनों की है जब मैं स्कूल में पढती थी। हमारे प्राचार्य अपने काम में व्यस्त काफी व्यस्त रहते थे ।उनके टेबल में उनका नाम और पद साथ में एमएससी केमेस्ट्री लिखा रहता था।जो मुझे अच्छा लगता था ,क्योकि उस समय ज्यादा विज्ञान विषय के शिक्षक नही थे।अक्सर सेल्युकर सर कभी दिख जाते तो नमस्ते करते इसके अतिरिक्त जब भी स्कूल में कोई कार्यक्रम रहता सबसे पहले स्कूल वे ही पहुँचते समय के भी काफी पाबंद बाकी सब लेटलतीफी।ऐसा ही सर का प्रेरक व्यक्तित्व था। भीड़ में अलग पह्चान ।11वीं में विषय चयन बायोलॉज लिया मैंने, सर को जब भी समय मिलता वो हमे समय निकाल कर पढ़ाने चले आते।इस बीच सर का प्रमोशन हुआ ।बस कुछ समय निकला था।गर्मी की छुट्टियों में हम नानाजी के घर गए थे वंहा से जब आये तो पता चला की वो और हमे बेहद दुःख हुआ साथ ही सभी विद्यर्थियो को उनका नही रहने के दुःख के साथ जब ये बात पता चली तो ऐसा लगता की हम पूरी दुनिया से कहे की सर बहुत अच्छे थे।
उनके प्रमोशन के बाद कुछ गड़बड़ हुआ जिसमे घोटाले में उनका नाम आया और जब ये बात उन्हें पता चली उसी वक्त उनकी हृदयगति रुक गयी हमेशा के लिए ज्यादा जानकारी तो नही थी क्योकि हम स्कूल में पढ़ते थे बच्चों के निच्छल मन में जो उनकी ईमानदारी की छवि थी इस ईमानदारी की ये सजा बेहद दुखमय लगा।वो जंहा कंही भी है सेल्युकर सर आपको मेरा शत शत अश्रुपूरित श्रंद्धांजलि।
