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बिगाड़ सके न कुछ भी कोरोना खुद विश्वगुरु फिर बनेगा जग सिरमौर दूज़ी लहर creation ज्ञान हे आर्य वीरों! जागो मृग मरीचिका जज्बात वो जश्न कोई मना न सके जितना विरोध मुश्किल हो दौर डबल मास्क हो श्वान भौंक रहे भौंकने दो चाह जश्न दिल

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