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मुश्किल हो दौर दो गज़ की दूरी जश्न खुद मृग मरीचिका सच काबू है हमने पाया श्वान भौंक रहे भौंकने दो विश्वगुरु फिर बनेगा जग सिरमौर दूज़ी लहर ध्यान कोई बहला सके हमें न सब उत्कृष्ट धीरज तो हम कभी न छोड़ें चाह ज्ञान वो जश्न कोई मना न सके creation हो

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