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आशा न्याय की हम सुख हो या फिर दुख हो अब हम का 52weekswritingchallenge दूर प्रकृति से सामाजिकता वैचारिक पूंजी निर्बलों के हम बनें सहायक इंसान सहारा बनें पीड़ित की वाणी बनें अधर्म और अन्याय परिवर्तन शाश्वत सत्य भौतिक सुख-साधन रहें सदा मिल जुलकर देवें सबको ही सम्मान हिन्दीकविता चलें प्रकृति की ओर

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