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शाम मेहरबान पाणिग्रहण शीशा वक़्त ढलती उम्र का दुख प्रफुल्लित रखना है मन युवा काल ढलती वय समस्याएं घायल नदी के बिंबों में ढलती स्त्री... ताजा रंग दोपहर बदौलत पथ शुभता का साथ निभाएं आजीवन शरीर एकं दूजे के इकलौते साथी यौवन

Hindi ढलती Poems