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हिन्दीकविता दूर प्रकृति से दृढ़ निश्चय आओ चलें घूम लें हम भी नंगे पाँव चलें मिलाते चलें प्रकृति की ओर ज्ञान वो हमको राख करके चलें गए चमकता सूर्य रोबोट नहीं इंसान बनें हम परिवर्तन शाश्वत सत्य hindikavita 31writing prompts 52weekswritingchallenge खामोश वो हमको खाक करने आये थे दिल सामाजिकता सुनहरी रेत नव पथ

Hindi चलें Poems