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हिन्दीकविता मिलाते बाधाओं को ठुकराते ही चलें। खाक सुनहरी रेत ज्ञान नव पथ आओ चलें घूम लें हम भी चलें प्रकृति की ओर hindikavita चमकता सूर्य खामोश वो हमको खाक करने आये थे रोबोट नहीं इंसान बनें हम नंगे पाँव चलें सामाजिकता निज पथ का राख दृढ़ निश्चय वो हमको राख करके चलें गए दूर प्रकृति से

Hindi चलें Poems