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निज पथ का आओ चलें घूम लें हम भी खाक बाधाओं को ठुकराते ही चलें। ज्ञान चलें प्रकृति की ओर सामाजिकता खामोश वो हमको खाक करने आये थे 31writing prompts दूर प्रकृति से राख हिन्दीकविता वो हमको राख करके चलें गए परिवर्तन शाश्वत सत्य दृढ़ निश्चय मिलाते चमकता सूर्य नव पथ रोबोट नहीं इंसान बनें हम नंगे पाँव चलें

Hindi चलें Poems