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जब मिला आपका साथ कोई डर नहीं पायल फिर एक ठोकर लगती है और हमें सम्हलने के लिए कह जाती है । हिन्दी कविता चलने की बेटियां बेहतर मिटने वाला है अंधेरा बदल गया बहार में मंजिल साथ काम पैर चर्चा सत्य गति को कटु चूड़ियाँ चलने लगी मेरी श्वांस

Hindi चलने Poems