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पैर बेड़ियाँ मंजिल फिर एक ठोकर लगती है और हमें सम्हलने के लिए कह जाती है । जब मिला आपका साथ बेहतर चलने लगी मेरी श्वांस हिन्दी कविता बदल गया बहार में चलने की दो भुला नहीं पाऊंगा सत्य तकलीफ मिटने वाला है अंधेरा हमारी सबसे बङी भूल है ।हम नहीं जानते हैं कि मेरे साथ चलने वाली राहें बिलकुल ठीक है तोड़ मुझ पर बड़ा आभार चाह है चर्चा

Hindi चलने Poems