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पायल गति को भुला नहीं पाऊंगा दो तकलीफ चाह है मिटने वाला है अंधेरा चूड़ियाँ तोड़ बदल गया बहार में चर्चा फिर एक ठोकर लगती है और हमें सम्हलने के लिए कह जाती है । मुझ पर बड़ा आभार चलने लगी मेरी श्वांस सत्य मार्ग कटु मंजिल किसी भी चाहत के लिए खुद को तवाह या बरबाद करना साथ पैर

Hindi चलने Poems