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आज खुल गई मधुशाला अच्छा सूर्यकान्त त्रिपाठी निराला मधुशाला तुम बरस काला गोरा पल भेद कुल खुल जाए उत्कृष्ट रचना hindikavita हिन्दीकविता मज़ा शराब टूटा मैं खुल के ज़िंदगी दांत

Hindi खुल Poems