STORYMIRROR

dr vandna Sharma

Others

5.0  

dr vandna Sharma

Others

ज़िंदगी मेरी परीक्षा लेती रही

ज़िंदगी मेरी परीक्षा लेती रही

1 min
408


ज़िंदगी मेरी परीक्षा लेती रही

कभी गिरती मैं कभी उठती रही

बस एक कसक दिल में यही रही

समझा क्यों नहीं किसी ने मन को मेरे

क्या इसमें भी गलती मेरी रही

सिर्फ देना और देना सीखा मैंने

लेने की चाह कभी न रही

फिर भी मिली बेरुखी और तन्हाई

क्या इसमें में भी गलती मेरी रही

लाख गहरा हो सागर सही

पर मेरे मन की धरती प्यासी रही

आयी घटा घिर के ,बादल भी खूब बरसे

आंखियाँ मेरी भी बरसती रही

क्या इसमें भी गलती मेरी रही

ज़िंदगी मेरी परीक्षा लेती रही

कभी गिरती मैं कभी उठती रही


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन