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Amit Kumar

Others

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Amit Kumar

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ज़िन्दगी भी कलम ही है

ज़िन्दगी भी कलम ही है

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ज़िन्दगी भी कलम ही है, जो भी चाहो उसे लिख दो,

सबेरा कोरा पन्ना है, सांझ तुम भी हसीं कर लो,

नहीं मालूम है कि कितने दिन अब तक गवाएं हैं!

मगर अब तो करो कुछ नेकी, और बंदगी लिख दो।


जहां गाथा नहीं गाया, कुंवर जब राम होते थे,

अवध कुमार होते थे, कुंवर जब राम होते थे,

हक़ीक़त ये भी है सब गुण, प्रभु श्रीराम में तो थे,

बने मर्यादा पुरुषोत्तम, कर्म महान तुम लिख दो।


तपस्या कर रहें हैं आज, कुछ अंजान राहों की,

मुख़ातिब हो नहीं पाए हैं, इन गुमराह राहों की,

चला है काफ़िला जिस ओर, देखो तुम भी निकले हो,

जरा रुक जाओ और अपना, निश्चित ठौर तुम लिख दो।


कर्म प्रधान ही जो, रखे है विश्व को अब तक,

सिर्फ किस्मत से ही रोटी, नहीं मिलती किसी को अब,

फ़क़त होती नहीं संगीत भी बिन ताल, लय और सुर,

मिलाओ ताल, लय और सुर, ज़िन्दगी गीत तुम लिख दो।


न देखो क्या अक्षमता है, तुम्हारा पांव रोके है,

चढ़े पर्वत हज़ारों है, न जिनके पांव होते हैं,

नहीं सुविधा कोई भी थी, मग़र इतिहास रच डाला,

मिसाइल देन जिसकी है, नाम कलाम तुम लिख दो।


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