यूँ ही चल रही है
यूँ ही चल रही है
अब मैं समझ गया जिन्दगी कुछ नही है,
जीता कोई नही बस यूँ ही चल रही है।
किसी की सुबह रंगीन, किसी की शाम रंगीन है,
कोई रोता हुआ उठता तो कोई हँसता हुआ सोता है,
अब मैं समझ गया जिन्दगी कुछ नही है,
जीता कोई नही बस यूँ ही चल रही है।
मिलना बिछड़ना यहाँ खेल है रोज का,
सदियों से यही रीत चल रही है,
साथ किसी ने किसी का निभाया,
अंतिम साँस तक नही है!
अब मैं समझ गया जिन्दगी कुछ नही है,
जीता कोई नही बस यूँ ही चल रही है।
जाने किस राह में चले जा रहे हैं लोग,
नदिया की तरह बहे जा रहे हैं लोग,
समुन्दर की तरह कोई बनता क्यों नही है।
थाह को अपनी अपने अंदर रखता क्यों नहीं है!
अब मैं समझ गया जिन्दगी कुछ नही है,
जीता कोई नही बस यूँ ही चल रही है।
क्यों मरते हो तुम रोज-रोज एक जीने के लिये यहाँ,
जिसे तुम समझते हो जीवन मौत से बत्तर वही है !!
