Become a PUBLISHED AUTHOR at just 1999/- INR!! Limited Period Offer
Become a PUBLISHED AUTHOR at just 1999/- INR!! Limited Period Offer

Chitra Yadav

Others

2.1  

Chitra Yadav

Others

यही वो दिन थे

यही वो दिन थे

1 min
252


यही दिन रहे होंगे वो शायद

जब बादल हमारे बीच की

दूरियाँ नापा करते थे

कभी यहाँ बरसते थे,

कभी वहाँ बरसते थे


यही वो दिन है,

जो एक अरसे बाद लौटे है

और बादल?

दूरियाँ नापते नापते कही

भटक गए होंगे शायद


ना बादल ही लौटे

ना बारिशें हीं आयी,

दिन तो वही है

मगर सूखा - सा पड़ा है....


Rate this content
Log in