STORYMIRROR

Sakshi Mutha

Others

3  

Sakshi Mutha

Others

ये दिल्ली है जनाब

ये दिल्ली है जनाब

1 min
379

ये दिल्ली है जनाब

दिल्ली थी दिलवालों की, 

यूँ बदली तस्वीर 

आज वही दिलों में है खार,

ये दिल्ली है जनाब।

ताज जहाँ खड़ा है,

जिसकी मोहब्बत पर है नाज

राज-नीति के नोक पर,

दिलो से मोहब्बतें कुचल डाली आज

ये दिल्ली है जनाब।

नारी के सम्मान पर 

जहाँ प्रश्न उठ रहे हजार,

अपराधियों को शरण मिले 

जहाँ है राज्य सरकार,

भारत की राजधानी का ये हाल है

सोचो दुसरे राज्य पर कैसा होगा वार,

नफरतों की बारिश में  

भीगा दिल्ली और टुटे दिलों के तार 

ये दिल्ली है जनाब।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

More hindi poem from Sakshi Mutha

माँ

माँ

1 min पढ़ें

पापा

पापा

1 min पढ़ें

दोस्त

दोस्त

1 min पढ़ें

पापा

पापा

1 min पढ़ें

साथ

साथ

1 min पढ़ें

यादें

यादें

1 min पढ़ें

मजहब

मजहब

1 min पढ़ें