वसुधैव कुटुंबकम
वसुधैव कुटुंबकम
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धरती ही परिवार मेरा,धरती ही संसार है ,
जग मे कितने रिश्ते बिखरे,सब से अपना प्यार है।
कोई यहाँ पर छोटा नहीं,धर्म नहीं जन्मजात है,
अन्धविश्वास के ठेकेदारों का बस यही व्यापार है।
मजहब के रंग अनेक,इबादत सबका अधिकार है,
तरह-तरह की बोली भाषा,संस्कृति मे भी निखार है।
वसुधैव कुटुंबकम के बोल सबके लिये बरदान है ,
इसका सच्चा अर्थ समझ लो दंश विद्रोह बेकार है।
