वंदना - हाइकू
वंदना - हाइकू
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पद वंदन
जगदीश तुम्हारे
नित करता
जगतीश्वर
आराध्य जगत के
पालनकर्ता
निर्गुण और
सगुण तुम्हीं बन
बन जाते हो
पथ अनेक
पर लक्ष्य सभी का
आराध्य तुम्हीं
मत अनेक
सब सच कहते
असत नहीं
अनंत सृष्टि
का निर्माण तुम्हारी
इच्छाशक्ति से
राम तुम्हीं
खुदा भी कहलाते
गोड बनते
विज्ञान कभी
समझा न सकता
अनेकों तथ्य
धरती चांद
सूरज तारे सब
को रच डाला
देव सकल
अपराध हमारे
विसरा देना
साधन हीन
आया शरण देव
आपकी अब
भव सागर
दुर्गम कहलाता
पार करा दो।
