STORYMIRROR

Bhãgyshree Saini

Others

3  

Bhãgyshree Saini

Others

वज़ह चाहे कोई भी हो

वज़ह चाहे कोई भी हो

1 min
157


वजह चाहे कोई भी हो

परिवार की टूटती डोर जैसे

संभल सी गई हो।

व्यस्त जीवन में परिवार से संबंध

जैसी टूटने सा लगा था।

वज़ह चाहे कोई भी हो...

जहां एक परिवार एक पल भी

साथ ना हो पाता था।

वहीं आज घंटों साथ बिताने लगे

रिश्तो में जैसे फिर से मिठास घुल गई हो

वज़ह चाहे कोई भी हो......

जहां हमारी धरती पर प्रदूषण की

चादर बिछ गई थी

वही आज सुगंधित हवाएं बहने लगी

जहां चंद्रमा के पास चमकता शुक्र तारा

प्रदूषण में कहीं छुप गया था

वही आज पुनः चमक उठा है

वज़ह चाहे कोई भी हो 

महमारी हो या फिर कुछ और।।


    



Rate this content
Log in