STORYMIRROR

Meera Parihar

Children Stories Inspirational

4  

Meera Parihar

Children Stories Inspirational

वीरांगना अहिल्याबाई

वीरांगना अहिल्याबाई

1 min
255


देश काल को छोड़ कर पीछे ,आगे सदा रही महिलाएं।

जन्मी बरस तीन सौ पहले ,आओ उनकी कथा सुनाएं।।१


नाम पिता का मानकोजी शिंदे,सरपंच हुआ करते थे वे।

ताल्लुक था धनगर समाज से ,वे नहीं थे राज घराने से।।२


वे थीं उस जमाने की, जब बेटी की शिक्षा नहीं जरूरी थी।

मगर पिता के संकल्पों में, तब नहीं ऐसी कोई मजबूरी थी।३

  

 उन्हें पिता ने घर पर ही तब पढ़ना-लिखना सिखलाया। 

 शास्त्रज्ञान साथ में अस्त्र-शस्त्र चलाना भी बतलाया।।४


जन्म चौंडी गाँव, महाराष्ट्र अहमदनगर,जामखेड़ में कहा जाता।

 आठ बरस की आयु पारिग्रहण, उनका हुआ कहा जाता।।५

  

  उनतीस वर्ष की हुई अवस्था ,छूट गया पति से नाता। 

हुईं बयालीस पुत्र मालेराव, सहा बिछोह दुखित हो माता।।६


 बासठ वर्ष की आयु दौहित्र, चल बसा कष्ट दे परिजन को।

 छयासठ वर्ष में दामाद यशवन्तराव फणसे छोड़ गये स्वजन को।।७

  

 पुत्री मुक्ताबाई सती हो गई,पति बिछोह न गया सहा।

 साथ महारानीअहिल्याबाई स्वजन ,उनका कोई नहीं रहा।।८


श्रेष्ठ योद्धाओं में शामिल हैंं, नेतृत्व अहिल्याबाई होलकर। 

विजय प्राप्त की मालवा, मराठों ने उनकी जय बोलकर।।९


जन्म जयंती पर स्मरण करें ,हम उनके लिए विशेष कर।

बनें साहसी आत्मविश्वासी, महिलाएं प्रेरणा उनसे लेकर।।१०


महिलाओं की प्रेरणा स्रोत महारानी अहिल्याबाई होलकर वीरांगना को शत् शत् नमन



Rate this content
Log in