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Geeta Upadhyay

Others

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Geeta Upadhyay

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उम्मीद पर टिकी है

उम्मीद पर टिकी है

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दुआओं में नहीं असर अब क्या कहूं,

नींद नहीं आंखों में, ये भी हर पल जगी है,

धोखा देने लगा है रगों में बहने वाला लहू 

दिल में एक चुभन सी लगी है,

हालात में इस यार, दोस्त ,अपने ,पराए 

सब की दरियादिली दिखी है।

इलाज करवा लिए सारे घर की 

हर चीज बिकी है,

आती नहीं कमबखत मौत भी,

अब तो चाहत में इसकी नजरें बिछी हैं, 

मेरी सांसों की डोरी तो सिर्फ

तेरी "एक उम्मीद पर टिकी है।"

 


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