Become a PUBLISHED AUTHOR at just 1999/- INR!! Limited Period Offer
Become a PUBLISHED AUTHOR at just 1999/- INR!! Limited Period Offer

तुम

तुम

1 min
187


तुम्हारी याद

अक्सर घुमड़ आती है बादलों की तरह

और छा जाती है दिलो दिमाग पर

कभी बरस पड़ती है रिमझिम रिमझिम

और भिगो जाती है पलकें और मन

कभी मूसलाधार बारिश की तरह बरसकर

कर जाती है तर-ब-तर तन बदन

लोग तो छोड़ जाते हैं यूँ ही

छूट नहीं पाती यादें।


Rate this content
Log in