टशन
टशन
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कोई नहीं है फ़ुरसत में,
सब अपनी उलझन में है।
कोई किसी की नहीं सुनता,
सब अपनी टशन में है।।
लोग भरे उघान में,
पर सारे अपनी मगन में है।
कोई रमन-यमन नहीं,
हर कोई अपनी टशन में है।।
यहॉं प्रेम का मतलब पानी है,
नहीं अंतरमिलन में है।
कोई राधा-कृष्ण नहीं,
हर कोई अपनी टशन में है।।
मस्ती भोग-विलास में है,
करना वन में गमन नहीं।
कोई अनुज अब लक्ष्मण नहीं,
हर कोई अपनी टशन में है।।
मॉं-बाप अकेले हैं यहॉं,
कहॉं कोई साथ भ्रमण में है।
कोई श्रवण कुमार नहीं,
हर कोई अपनी टशन में है।।
