STORYMIRROR

Somesh Kulkarni

Others

2  

Somesh Kulkarni

Others

तरकीब

तरकीब

1 min
264

जिंदा हूँ या नहीं मैं

आँखें तो मिचने दो,

जीने की अब मुझे भी

तरकीब सोचने दो।


बाकी न अब रहा मैं

मुझसे तुम्ही सुनोगे,

लाने ख़रीद ख़ुशियाँ

खुद को तो बेचने दो।


ऐसा सवाल हूँ मैं

मेरा जवाब ना है,

गैरों से क्या बगावत

अपनों से पूछने दो।


इतना तुम्हें कहूँगा

झूठा न था मैं अब तक,

जो राज दफ़न उनसे

परदा तो खींचने दो।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन