स्वार्थ की मित्रता
स्वार्थ की मित्रता
1 min
171
घातक होती है सदा ही
स्वार्थ की मित्रता
इससे अच्छी होती है
सज्जनों की शत्रुता।
स्वार्थ करें चित घायल
हो मन के कारे बादल।
स्वार्थ भावना तोड़े रिश्ते
स्वार्थी होते नहीं फरिश्ते।
स्वार्थ बिगाड़े मन की काया
अच्छी नहीं स्वार्थ की छाया।
सभी लोगों स्वार्थ को छोड़े
मन से मन के रिश्ते जोड़े।
कुकर्मों पर जो गुरूर करेगा
उसे स्वार्थ सुख से दूर करेगा
तू जस् करेगा तस् भरेगा
भव जीवन से नहीं तरेगा।
