सूर्य
सूर्य
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कहाँ खोया तू दुख में प्यारे,
देख सूर्य क्या कह रहा,
चीर हर तम को तू,
खुद प्रकाश बन फैल जरा।
कौन से अंधकार जो,
तू भेद सकता नही,
कौन से है वो उजियारे,
जो तू ला सकता नही,
एक कदम जरा बढ़ा,
खुद से जीत जाने को,
कोई नही रोक सकता तुझे,
सूर्य सा जगमगाने को।।
