समरथ को नहीं दोष गुसाईं
समरथ को नहीं दोष गुसाईं
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चले आज हम किन राहों पर,
हमने क्या खोया क्या पाया है।
चारों ओर बस बारूद बिछी है,
बम, मिसाइल की ऊपर छाया है।
सारा विश्व मौन खड़ा है,
बस अपना स्वार्थ सभी को भाया है।
कहां गये वह संयुक्त गीत,
जिसे अब तक विश्व ने गाया है।
कहां है मानव के अधिकार,
क्या उसे कोई देश देख न पाया है।
समरथ को नहीं दोष गुसाईं,
एकदम सटीक सामने आया है ।
