" सिरफिरी सी मैं "
" सिरफिरी सी मैं "
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बेलगाम, बेपरवाह
अलमस्त, सिरफिरी सी मैं,
अपने ही उठाये सवालों के
जवाब ढूंढती मैं,
कभी सब कुछ चाहिये मुझे
कभी कुछ भी नहीं
ख़ुशी ढूँढती मैं,
खुद को ही जाल में फंसाती..
उसमें उलझती, खुद से ही लड़ती
गिरह दर गिरह खुद को
सुलझाती मैं,
कभी पानी की तरह शान्त
तो कभी सागर की तरह
हिलोरें लेती मैं,
बेलगाम, बेपरवाह
अलमस्त, सिरफिरी सी मैं।
