शहर
शहर
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नया शहर है नए लोग हैं, कुछ चेहरे पहचाने हैं
कब तक हैं इस शहर में रहना, यह तो खुदा ही जाने है
कितने दिन इस शहर में रह कर,
हम ने साँसे लेनी है कब है वापिस लौट के जाना, यह तो खुदा ही जाने है
जितने दिन भी शहर में हो तुम,
बाँटो सब में ही खुशियाँ
खुशी और गम का लेखा-जोखा, यह तो खुदा ही जाने है
दिल का धड़कना साँसे लेना,
यह ही न बस जीवन है याद करें जब न हों शहर में, कुछ लोग तुम्हें पहचाने हैं
शहर में दिखती रौनक हरदम,
इस को कोई फर्क नहीं कितने आए रुके थे कितना, यह तो खुदा ही जाने है
