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Yogeshwari Arya

Others

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Yogeshwari Arya

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सौभाग्यवती

सौभाग्यवती

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जीवन का वह प्रहर 

जब नए रिश्ते एकाएक 

हमारे साथ जुड़ने लगते हैं।


हम किसी की बेटी से 

किसी की बहू, 

किसी की चाची,

किसी की मामी,

किसी की पत्नी,

बन जाते हैं।


जीवन तट से 

ऐसे समुद्र की ओर 

आगे बढ़ता है 

जहां सैकड़ों नदियां 

मिलती है ।


पुनर्जीवन का 

एक अकथित  

एहसास होता है।


प्रेम, सौभाग्य, सम्मान 

सब कुछ एक साथ 

एक थाल में 

परोसे मिलता है।


नए रिश्तों की चमक 

पुराने रिश्तों की मिठास 

दोनों मिलकर 

हमारे जीवन को 

चमकीली मिठास में

रंग देती हैं।


जीवन का वह प्रहर 

हमें सौभाग्यशाली से 

सौभाग्यवती

बना देता है।


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