रूह के एहसास
रूह के एहसास
1 min
163
क्यू लिपटकर रह न पाए रूह से एहसास भी
चाहते थे हम तो दिल के पास रहना खास भी।
हाल-ए-दिल अब कैसा हैं क्या बताए हम सनम
ख़्वाब हमने देखें थे तुमसे लगाई आस भी।
क्या लड़कपन था मेरा जो बात समझा पाई ना
कंपकंपाये लब ने लफ्जों से बुझाई प्यास भी।
दिल के कहने पर कभी भी फैसला ना कीजिये
बात छोटी हो या बड़ी दिमाग़ रक्खो पास भी ।
अब सूना रखना नहीं मन के मकानों को अभी
रोशनी फिर आएगी करना "नीतू" प्रयास भी।
