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Mukesh Bissa

Others

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Mukesh Bissa

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रिश्ते

रिश्ते

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कैसे है ये रिश्ते

अनजाने

न जाने

न पहचाने

हर कोई

इन रिश्तों को

निभा नहीं रहा 

है वह तो 

केवल

ढो रहा है


हैं तो ये रिश्ते

बंधनों में

बंधे हुए पर

ये बंधन ही 

कच्चे धागों का है

जब चाहा तोड़ दिया

और जब चाहा

जोड़ दिया

इन्हें एक गांठ से


अपने स्वार्थों की

पूर्ति के लिए हम

इन रिश्तों का

पालन करते हैं

मतलब निकल जाने

पर

रिश्तों को ताक में

रखते हैं



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