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रात की चौखट पर

रात की चौखट पर

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रात की चौखट पर बैठे बैठे

ये दिल तुझे पुकारता है बार बार

लौट कर तुम कब आओगे घर

हर पल हर घड़ी द्वार पर है नजर

काम से तुमको नही है फुर्सत

काम तेरा बन गया मेरी सौतन

इन्तेजार कितना करवाते हो सनम

बार बार तुमसे लड़ना हमको भाता नही

ये रूठने मनाने का सिलसिला हमको भाता नही

पर तुम भी हो आदत से मजबूर सनम

देर करना तेरी आदत बन गयी अब तो

और इन्तेजार में आंसू बहाना हमारी किस्मत


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