STORYMIRROR

रात की चौखट पर

रात की चौखट पर

1 min
943


रात की चौखट पर बैठे बैठे

ये दिल तुझे पुकारता है बार बार

लौट कर तुम कब आओगे घर

हर पल हर घड़ी द्वार पर है नजर

काम से तुमको नही है फुर्सत

काम तेरा बन गया मेरी सौतन

इन्तेजार कितना करवाते हो सनम

बार बार तुमसे लड़ना हमको भाता नही

ये रूठने मनाने का सिलसिला हमको भाता नही

पर तुम भी हो आदत से मजबूर सनम

देर करना तेरी आदत बन गयी अब तो

और इन्तेजार में आंसू बहाना हमारी किस्मत


Rate this content
Log in