राम कहानी
राम कहानी
पावन जल की धारा लेकर पुर उत्तर सरयू बहतीं,
राम कहानी प्रहर आठ वो इस जग से हैं कहतीं,
राम कहानी हां वही कहानी जिसने त्याग सिखाया,
केन्द्र बिन्दु समरसता लेकर जीवन का पाठ पढ़ाया,
रहे अछूता बिन्दु न कोई,ऐसा सार बताया,
आचरणों से सकल सृष्टि को केवल प्यार सिखाया,
धर्म,नीति,मर्यादा का पालन ही सबकी इच्छा हो,
इनके पालन में इस जग में चाहे जितनी परीक्षा हो,
घबराहट न लेशमात्र हो हमको यही सिखाया,
उत्तम गुण है धैर्य जगत में आजीवन हमें बताया,
भेद न हो कथनी करनी में इसका ध्यान सदा रक्खा,
ऐसा करते-करते जग में विष का स्वाद सदा चक्खा,
रंगभूमि अथवा रणभूमि,विनय नहीं हम भूलें,
कभी क्रोध के पलड़े में पल भर को भी न झूलें,
भेदभाव और छुआछूत से दूर सदा हम हो लें,
और पराए दुःख में भी हम अपने नयन भिगो लें,
अंतर किए बिना कोई हम काम सभी के आएं,
आचरणों से अपने हम धरती पर स्वर्ग बनाएं,
मानवता की इन शिक्षाओं को ले मां सरयू बहतीं,
राम कहानी प्रहर आठ वो इस जग से हैं कहतीं।
अमलेन्दु शुक्ल
सिद्धार्थनगर उ०प्र०
