प्यार यही है
प्यार यही है
1 min
172
सावन के बारिशों की वो शबाब बूंदें
जो धरा पर पड़ती है तो
लगता है मानो बरसों की प्यास बुझ
रही है।
प्यार यही है
फूलों के ऊपर शबनम की ख़ूबसूरती
जो फूल पर पड़ती है तो
लगता है मानो मोती चमक रही हो।
क्या यही प्यार है
एक-दूजे की भावनाओं की क़द्र करते
हुए साथ निभाना
जो इंसान पर पड़ती है तो
लगता है मानो इंसानियत एक
रूह हो रही हो।
हाँ यही प्यार है
मुस्कान से हँसता हुआ नूरानी चेहरा
जो आईने में पड़ता है तो
लगता है मानो ख़ूबसूरत हुस्न
निहार रही हो।
