STORYMIRROR

Anuradha Negi

Others

3  

Anuradha Negi

Others

पथिक

पथिक

1 min
191

पथ मेरा प्रकाशित कर दो 

नई उमंग नई कलियों से 

प्रकाश की ऐसी राह बना दो 

जन-जन गुजरे मेरी गलियां से।

मैं नादान अजनबी इस जग की

मुझे हर पल अपनापन दो

मैं रहूं हर जन के अंदर 

तुम ऐसा जग जीवन दो।

निकलूं जब किसी मंजिल की ओर 

हर भोर मेरी उत्साहित कर दो 

कदम मेरे ना रुके मुड़े कभी

मंजिल में यूं समाहित कर दो।

निगाहें ढूंढे तुझे जब राहों में 

एक बोल से मुझे बुला लेना

आसरा मेरा बनाए रखें यूं

हर नादानी मेरी भुला देना।

पथ मेरा तुम उजागर कर दो

अंधेरे के जुगनू की तरह यूं

उसे देखकर आगे बढूं मैं

मिले मंजिल तो आभार करूं।

                


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन