प्रेम
प्रेम
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प्रेम करना आसान तो है
पर प्रेम का व्याख्यान करना
बहुत मुश्किल है
या यों कहें असंभव है।
प्रेम हमारे शरीर में बसने वाला
श्वास की तरह है।
जिसे हम स्वयं महसूस तो कर सकते हैं,
पर औरों को दिखा नहीं सकते।
और जिस तरह श्वास हमारे
जिन्दा रहने के लिए महत्वपूर्ण है।
ठीक उसी तरह
प्रेम हमारे जीवन के सफ़र को
आगे ले जाने के लिए महत्वपूर्ण है ||
