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Neeraj pal

Others

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प्रेम-भक्ति

प्रेम-भक्ति

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श्रद्धा सुमन के पुष्प चढ़ाऊँ , मन में अपने तुमको बसाऊँ

 वंदना करुँ मैं तुम्हारी, सुन लीजो तुम अरज हमारी।।


 संकट मोचन मारुति नंदन, नित-नित तुम्हारे ही गुण गाऊँ।

 नाम तुम्हारा इतना पावन, लाज बचाओ अब तुम हमारी।।


 दर पर आकर बैठ गया मैं, सर अपना मैं नित झुकाऊँ।

 तुम तो ठहरे अंतर्यामी, लगा दो नैया पार हमारी।।


सीता मैया के तुम हो दुलारे, राम नाम की महिमा नित गाऊँ।

प्रेम-भक्ति कोई तुमसे सीखे, कैसे करूं मैं सेवा तुम्हारी।।


प्रभु राम के हृदय में तुम बसते, किस विधि तुमको मैं रिझाऊँ।

"नीरज, के बस एक तुम ही हो, हरऊ नाथ मम संकट भारी।।



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