शिव अर्पण शिव अर्पण
सत्य का जो मित्र हैं करम तेरे पवित्र हैं तो तुझमे ही शिव हैं...! सत्य का जो मित्र हैं करम तेरे पवित्र हैं तो तुझमे ही शिव हैं...!
सूचित किया -- " स्थानाभाव के कारण, आपकी रचना का सदुपयोग नहीं कर पा रहे हैं , इसीलिए , ... सूचित किया -- " स्थानाभाव के कारण, आपकी रचना का सदुपयोग नहीं कर पा रहे...
उसकी चाहत से उसकी जरूरत मै बन गई. उसकी चाहत से उसकी जरूरत मै बन गई.
खुद को गुलामी के पिंजरे से आज़ाद करते हैं, चल खुद पर कुछ विश्वास करते हैं। खुद को गुलामी के पिंजरे से आज़ाद करते हैं, चल खुद पर कुछ विश्वास करते हैं।
अब भी उम्मीद लगाकर बैठे कि छूऐगा आकर पैरों को, तेरी राह देखते-२ अबतक बूढ़ी आँखों में थकान ना हुई........ अब भी उम्मीद लगाकर बैठे कि छूऐगा आकर पैरों को, तेरी राह देखते-२ अबतक बूढ़ी आँखों ...