फूलों से कमल बच्चे
फूलों से कमल बच्चे
गोलू मोलू से ये छोटे-छोटे बच्चे,लगते हैं बड़ी ही प्यारे,
मम्मी-पापा, दादा-दादी, भाई-बहन, सबके होते दुलारे,
तन के सुंदर, मन के सुंदर जैसे मीठी सी है कोई गोली,
मन को मोहने वाले ये, लगे प्यारी तुतलाहट भरी बोली,
मुस्कुराहट इनकी इतनी प्यारी, रोते हुए को भी हंँसा दे,
मासूम चेहरा मनमोहक इतना मोह के जाल में फंँसा दे,
हिल मिल जाते सबसे ऐसे, पूरा संसार हो जैसे अपना,
पराया कोई न इनके लिए इन बच्चों का है क्या कहना,
माता-पिता के आंँखों के तारे ये,देते उनको जीवनदान,
बड़े से बड़ा गम भुलाती इनकी एक प्यारी सी मुस्कान,
देख लाड लड़ाए दादी, दादा देते अपनी मूछों पर तान,
घंटों निहारते गोद में लेकर, होकर दुनिया से अनजान,
कितनी भी उदासी जीवन में या हो जाए कोई अनबन,
सुनकर इनकी मीठी सी बोली दूर हो जाए हर उलझन,
बच्चों के चहल-पहल से, खिला-खिला लगता उपवन,
नन्हे-नन्हे कदमों के आगमन से महकता है घर आंगन,
सपने संजोते आंँखों में, इनसे है जीवन की खुशहाली,
सबके होठों की मुस्कान बच्चे, हैं इनकी बातें निराली,
ईश्वर का है ये नया तोहफा बदलती इनसे जीवनधारा,
बच्चों के इर्द-गिर्द ही सिमट जाता, पूरा संसार हमारा,
फूलों सा कोमल मन इनका होते तितली से ये चंचल,
पिता को मिले गर्व इनसे, माता को ममता का अंचल,
सबका ध्यान खींचे इनकी अजब गजब अठखेलियाँ,
मन को असीम सुख देती है इनकी निश्चल शैतानियांँ,
सुख-दुख का इन्हें भान कहांँ सब इनके लिए समान,
कांँटों को भी छूने की कोशिश करे इतने होते नादान,
कब सोते हैं, कब जाग जाते ये, कोई समझ न पाता,
अपनी मर्जी के मालिक ये सब इनकी मर्जी से होता,
कभी मन हो तो रात भर जाग ये, कभी चैन से सोए,
कभी करते, शरारतें ऐसी कि सब इनमें ही खो जाए,
बच्चों से होती दुनिया रंगीन, एक घर घर बन जाता,
गूंजे जहांँ बच्चों की किलकारी वहांँ स्वर ईश्वर होता।
